होली के बाद अब 02 अप्रैल को देश के कई क्षेत्रों में रंग पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। यूं तो ये त्यौहार लगभग हर जगह मनाया जाता है। परंतु बताया जाता है कि मुख्य रूप रंग पंचमी का त्यौहार महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के इंदौर, राजस्थान के जैसलमेर में धूम धाम से मनाया जाता है। बता दें इस दिन लोग एक दूसरे को रंग न लगाकर बल्कि आसमान में गुलाल उड़ाते हैं। कहा जाता है ये रंग देवी-देवताओं को समर्पित करने के भाव से ऐसा किया जाता है। आइए अब जानते हैं कहां कहां धूम धाम से मनाया जाता है रंग पंचमी का ये पर्व-

मध्यप्रेदश के इंदौर में ऐसे मनाई जाती है रंग पंचमी-
कहा जाता है इंदौर की रंग पंचमी मनाने की अपनी एक अलग शैली है, रंगारंग गैर शहर के मध्य राजबाड़ा, जेल रोड जैसी मुख्य सड़कों से पानी में घुले रंगों की बौछार करते हुए निकलती है, गुलाल उड़ाया जाता है। स्थानीय नगर निगम इंदौर उस उद्देश्य से फायर ब्रिगेड के वाहनों का इस्तेमाल भी करते हैं। ऐसा कहा जाता है शासनकाल के दौरान से ही रंगपंचमी का यह त्यौहार मनाया जाता है। इसके अलावा इस दिन यहां बहुत बड़ा जुलूस भी निकाला जाता है, जिसे गेर कहा जाता। बताया जाता है इंदौर के ज्यादातर इलाकों में सरकारी छुट्टी होती है। सड़कों पर रंग मिश्रित सुगंधित जल छिड़का जाता है।

महाराष्ट्र की रंग पंचमी-
बात करें महाराष्ट्र की रंग पंचमी को तो यहां भी इसे प्राचीन समय से खेला जा रहा है। यहां खेली जाने वाली रंग पंचमी के दौरान सामान्य रूप से सूखे गुलाल का
इस्तेमाल किया जाता है। विशेष भोजन बनाया जाता है जिसमे पूरनपोली मुख्यत होती है। तो वहीं मछुआरों की बस्ती में इस त्यौहार का मतलब नाच, गाना और मस्ती होता है। मान्यता ये भी है कि ये मौसम रिश्ते यानि शादी तय करने के लिए अच्छा माना जाता है। तमाम मछुआरे इस त्यौहार पर एक दूसरे के घरों को मिलने जाते हैं और मस्ती में समय व्यतीत करते हैं।

राजस्थान के जैसलमेर की रंग पंचमी
राजस्थान के जैसलमेर मंदिर महल में इस अवसर पर विशेष रूप लोकनृत्य होता है, जिसमें पूरा वातावरण डूबा दिखाई देता है। तो वहीं यहां कि हवा में लाल नारंगी और फ़िरोज़ी रंग घुले दिखाई पड़ते हैं। इसके अलावा यहां अन्य कई सांस्कृतिक आयोजन संपन्न होते हैं व रंगों से कई प्रकार के खेल खेले जाते हैं।