मध्य प्रदेश

जड़ी-बूटियों पर रिसर्च के लिये फण्ड बनाए लघु वनोपज संघ : सहकारिता मंत्री डॉ. सिंह

भोपाल

सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह के मुख्य आतिथ्य, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री  आरिफ अकील की अध्यक्षता, जनसम्पर्क मंत्री  पी.सी. शर्मा और अध्यक्ष राज्य वनोपज संघ  वीरेन्द्र गिरि गोस्वामी के विशिष्ट आतिथ्य में आज भोपाल के लाल परेड ग्राउण्ड पर अंतर्राष्ट्रीय हर्बल वन मेला शुरू हुआ। वन विभाग और राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा आयोजित वन मेले में देश-प्रदेश, भूटान और नेपाल के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। पाँच दिवसीय मेले में 19 से 22 दिसम्बर तक नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श शिविर, 20-21 दिसम्बर को कार्यशाला और 22 दिसम्बर को क्रेता-विक्रेता सम्मेलन होगा।

सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि हमारे देश में हजारों वर्ष से जड़ी-बूटियों से इलाज की परम्परा रही है। आयुर्वेद की विदेशों और देश में पुन: बढ़ती लोकप्रियता उसकी विश्वसनीयता को सुदृढ़ करती है। उन्होंने हर्बल मेले के माध्यम से जन-जागरूकता के प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि लघु वनोपज संघ जड़ी-बूटियों के रिसर्च के लिये फण्ड स्थापित करे। डॉ. सिंह ने कहा कि हजारों वर्ष पूर्व हमारे देश में धनवंतरी की चिकित्सा विधि और सुश्रुत की शल्य-चिकित्सा विद्यमान थी। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री  अर्जुन सिंह ने राज्य लघु वनोपज संघ की स्थापना कर वनोपज संग्राहकों को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त करने का नेक काम किया। डॉ. सिंह ने आदिवासियों के भोलेपन का जिक्र करते हुए कहा कि संघ की स्थापना के पहले आदिवासी मात्र आधा किलो अनाज के बदले बिचौलियों को 2-3 किलो चिरोंजी दे दिया करते थे।

गैस त्रासदी मंत्री  आरिफ अकील ने कहा कि भोपालवासियों को सालभर हर्बल मेले का इंतजार रहता है। उन्होंने मेले में भाग लेने वाली विभिन्न आयुर्वेदिक कम्पनियों और वैद्यों से गैस पीड़ित मरीजों की किडनी, ह्रदय आदि से जुड़ी बीमारियों के इलाज पर ध्यान देने का अनुरोध किया।

जनसम्पर्क मंत्री  पी.सी. शर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में वनोपज किसानी के साथ आमदनी का एक अतिरिक्त साधन है। वन में रहने वाले आदिवासियों की आय बढ़ने से प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

अपर मुख्य सचिव  ए.पी. वास्तव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. यू. प्रकाशम, प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ  एस.के. मण्डल, विधायक  सुरेन्द्र सिंह शेरा, संघ के संचालक मण्डल के सदस्य, बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी, वन समितियों के सदस्य और नागरिक उपस्थित थे।

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