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तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु संयंत्र पर हुआ था साइबर हमला

 चेन्नई 
तमिलनाडु स्थित देश के सबसे बड़े कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (केकेएनपी)की सुरक्षा में इस साल के शुरुआत में सेंध लगाई गई थी।

एक अधिकारी और हैकिंग का पता लगाने में शामिल रहे एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ के मुताबिक यह हमला किसी दूसरे देश से किया गया। इन दोनों लोगों ने हिन्दुस्तान को बताया कि हमले के कारण नेटवर्क के उस संवेदनशील हिस्से को कोई नुकसान नहीं पहुंचा जिसका संयत्र के संचालन से संबंध है। नेटवर्क के इस संवेदनशील हिस्से को एक अलग नेटवर्क के तहत रखा गया है ताकि किसी तरह के साइबर हमले से इसे बचाया जा सके।

लेकिन हमलावर संयंत्र के प्रशासनिक नेटवर्क तक पहुंचने में कामयाब रहे। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ पुखराज सिंह ने कहा कि सरकार को पहले ही इस बारे में सूचित कर दिया गया था। सिंह ने सोमवार और मंगलवार को कई ट्वीट करके बताया कि उन्हें पहली बार हैकिंग का पता लगाने वाली एक ‘थर्ड पार्टी' ने अलर्ट किया था। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा समन्वयक को तीन सितंबर को अलर्ट किया गया। सिंह ने बताया कि हमलावरों का एक और लक्ष्य था जोकि बहुत गंभीर बात है, हालांकि उन्होंने इसका ब्योरा नहीं दिया।

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआईएल) ने भी बुधवार को माना कि केकेएनपी पर साइबर हमला किया गया था। हालांकि दावा किया गया कि इससे सिस्टम पर कोई असर नहीं पड़ा और रिएक्टर पूरी तरह सुरक्षित हैं।

ट्विटर से मिली जानकारी केकेएनपी नेटवर्क को लेकर तथाकथित घटना का खुलासा सबसे पहले 28 अक्तूबर को एक ट्विटर पोस्ट से हुआ। इस अकाउंट का नाम है- a_tweeter_user. इस पोस्ट में एक डाटा फाइल की ओर संकेत था जिसे साइबर सुरक्षा कंपनी की वेबसाइट पर अपलोड किया गया था।

दूसरे हमले पर साधी चुप्पी तथाकथित दूसरे साइबर हमले के बारे में पूछने पर साइबर सुरक्षा विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि इसका खुलासा केवल सरकार कर सकती है। जब नेशनल साइबर समन्वय केंद्र के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पंत से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इनकार कर दिया।

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