छत्तीसगढ़

दिव्यांगता पर सहानुभूति न दिखायें, हौसला बढ़ायें – चित्रसेन

रायपुर
जिंदगी हर किसी को दोबारा मौका देती है, दिव्यांग है तो क्या हुआ हम दया या सहानुभूति नहीं बल्कि एक सामान्य  आदमी की तरह ही जिंदगी जीने का हक चाहते है। प्रोस्थेटिक लेग के जरिए 5685 मीटर की ऊंचाई वाले किलिंमजारो की चोटी लांघने वाले चित्रसेन साहू बुलंद हौसले के साथ कहते है कि अभी तो उन्हें और भी ऐसे शिखरों की ऊंचाई चढना है।

वृंदावन सभागार में महावीर अग्रवाल फाउंडेशन, रायपुर नागरिक परिषद, रोटरी क्लब आॅफ रायपुर ईस्ट के संयुक्त आयोजन में एक यात्रा शिखर तक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। दिव्यांग चित्रसेन साहू जिनका 2014 में एक ट्रेन हादसे में दोनों पैर चले गया था लेकिन उन्होंने हौसला नहीं खोया। प्रोस्थेटिक लेग के सहारे वे सामान्य जिंदगी जी रहे है और दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन रहे है। चित्रसेन बास्केट बॉल खेलने से लेकर विमान तक की सवारी एक सामान्य आदमी की तरह करते है। उन्होंने 5685 मीटर ऊंची किलिमंजारो (अफ्रीका) चोटी की चढ़ाई 3-5 डिग्री माइनस तापमान में चढ़कर इतिहास रच दिया। अपने स्मरण साझा करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढिना सबले बढिना और भारत माता की जय के साथ जब उन्होंने तिरंगा फहराया तो गर्व से उनका सीना चौड़ा हो गया। हमें दया या सहानुभूति नहीं बल्कि समाज में एक सामान्य व्यक्ति की तरह जिंदगी जीना चाहते है, सम्मान पाना चाहते है। मोर स्मार्ट सिटी ने उन्हें नो प्लास्टिक अभियान के लिए ब्रांड एम्बेसडर भी बनाया है।

महापौर प्रमोद दुबे का भी सम्मान किया गया। पार्षद से लेकर महापौर तक का सफर और संघर्ष की दास्तान भी उन्होंने सुनाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा ने कहा कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है यह चित्रसेन ने कर दिखाया है, जब हम ऐसे लोगों का सम्मान करते है तो खुद सम्मानित होते है। महावीर अग्रवाल फाउंडेशन के मनमोहन अग्रवाल, रोटेरियंस सुभाष साहू, राजेश अग्रवाल, कपिल अग्रवाल, जितेंद्र अग्रवाल व चित्रसेन के माता-पिता सम्मान समारोह में प्रमुख रुप से उपस्थित थे।

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