मध्य प्रदेश

‘सखा कैब’ में सफर करने पर महिलाओं को मिलेगी सुरक्षा की फुल गारंटी

इंदौर
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में पहली बार महिलाओं के लिए अब महिलाएं (Womens) ही कैब (Cab) चलाएंगी, जिसमें सिर्फ महिला यात्री या परिवार के साथ चलने वाले ही सफर कर पाएंगे. जबकि ये कैब इंदौर एयरपोर्ट (Indore Airport) से मिल सकेंगी. इंदौर के सांसद शंकर लालवानी (MP Shankar Lalwani) और एयरपोर्ट के डायरेक्टर आर्यमा सान्याल (Aryama Sanyal) ने हरी झंडी दिखाकर इसकी शुरुआत की है. फिलहाल तीन सखा कैब चलाने की शुरुआत की गई है और अगले एक साल में इनकी संख्या बढ़ा कर 15 किए जाने की योजना है.

मध्य प्रदेश का इंदौर ऐसा पहला शहर बन गया है, जहां महिलाएं महिलाओं के लिए कैब चलाएंगी. इन कैब में सिर्फ महिलाएं ही सफर कर पाएंगी या परिवार सफर कर पाएगा. ये कैब इंदौर एयरपोर्ट पर 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी. जबकि कोई भी महिला यात्री कॉल सेंटर के नंबर पर कॉल कर बुकिंग करवा सकेगी. वहीं इसका किराया शुरू के 20 किलोमीटर के लिए 350 रुपए और उसके बाद 10 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से होगा.

सखा कैब नाम से जाने जाने वाली ये कैब दूसरी कैब से बिलकुल अलग है. इनमें सुरक्षा के लिए पहले तो महिला ड्राइवर को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिग दी गई. साथ ही महिला ड्राइवर और महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन लगाया गया है. महिला ड्राइवर और महिला यात्री किसी भी आपात स्थिति में इस पैनिक बटन को दबा कर मदद प्राप्त कर सकेंगी. जबकि कैब में खास तरह का स्प्रे दिया गया है, जिसे छिड़कर वे अपना बचाव कर पाएंगी. ये सखा कैब जीपीएस के जरिए कंट्रोल रूम से जुड़ी रहेगी, जिसकी सूचना कंट्रोल रूम के साथ ही नजदीकी पुलिस थाने को पहुंच जाएगी. यही नहीं, महिला ड्राइवरों को पुलिस थानों की भी लिस्ट के अलावा डायल 100 की विशेष ट्रेनिग भी दी गई है.

इन महिला कैब को एयरपोर्ट पर सांसद शंकर लालवानी और एयरपोर्ट की डायरेक्टर आर्यमा सान्याल ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस मौके पर केक भी काटा गया. सांसद लालवानी का कहना है कि इंदौर में चौबीस घंटे फ्लाइट रहती हैं, जिनमें अकेली महिलाएं सफर कर इंदौर में पहुंचती है. यकीनन उनको महिला कैब से घर पहुंचने में अब सहूलियत महसूस होगी. जबकि महिला ड्राइवरों को भी रोजगार मिल गया है. वहीं एयरपोर्ट की डायरेक्टर आर्यमा सान्याल का कहना है कि कई बार रात में महिलाएं फ्लाइट से इंदौर आतीं हैं और वो महिला स्वचालित गाड़ियों के बारे में पूछताछ करती हैं. उन्हीं महिला यात्रियों और उनके सुरक्षित सफर के लिए इन कैब को संचालित किया जा रहा है.

महिला ड्राइवरों को ट्रेनिंग देने वाले समान सोसायटी संस्थान के डायरेक्टर राजेंद्र बंधु ने बताया कि शहर में चार साल पहले महिलाओं के लिए कार ड्राइविंग ट्रेनिंग की शुरुआत की गई थी. जबकि आज 200 महिलाओं को ड्राइवर के रूप में प्रशिक्षण दिया जा चुका है. यकीनन आज 80 से ज्यादा महिलाएं कई स्थानों पर ड्राइवर की नौकरी कर रही हैं. कैब संचालन के लिए फिलहाल चार महिला ड्राइवरों को चुना गया है, जिनकी संख्या आगे चल कर बढ़ेगी. साथ ही इससे महिलाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ेंगे.

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