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 2 सेक्टरों ने बदली इबारत, आर्थिक मोर्चे पर बांग्लादेश से ऐसे पिछड़ा भारत

नई दिल्ली 
जीडीपी ग्रोथ में भारत से भी आगे हो गया है बांग्लादेशबांग्लादेश गारमेंट निर्यात के मामले में काफी आगे हैबांग्लादेश ने श्रम सुधारों में भी अच्छी सफलता हासिल की हैवहां कृष‍ि क्षेत्र की विकास दर भी काफी अच्छी रही है

एक दिन भारत को यह आभास हुआ कि जीडीपी ग्रोथ के मामले में बांग्लादेश ने उसे पीछे कर दिया है. यह तब हुआ, जब सितंबर, 2019 में एशि‍याई विकास बैंक (ADB) ने अपने एशि‍याई विकास आउटलुक (ADO) रिपोर्ट को अपडेट कर दिया. हालांकि इसके पहले के अप्रैल आउटलुक में भी इसका साफ संकेत मिल गया था.

एडीबी ने साल 2019 के लिए बांग्लादेश के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 8 से बढ़ाकर 8.1 फीसदी और भारत के जीडीपी ग्रोथ को 7.2 फीसदी से घटाकर 6.5 फीसदी कर दिया था. इसके अलावा, इसने 2020 के लिए भी बांग्लादेश के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 8 फीसदी पर बरकरार रखा, जबकि भारत के ग्रोथ अनुमान को 7.3 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया.

हालांकि, दोनों देशों के आधिकारिक आंकड़ों और उनकी वित्तीय गणनाओं का इस्तेमाल करके देखें तो बांग्लादेश ने इस मामले में वित्त वर्ष 2018 में ही पीछे छोड़ दिया था, जिसे नीचे दिए गए ग्राफ से भी समझा जा सकता है. इसकी वजह है दोनों देशों के वित्त वर्ष की गणना में अंतर. बांग्लादेश का ‘फिस्कल ईयर’ कैलेंडर 1 जुलाई से 30 जून तक होता है, जबकि भारत का फिस्कल ईयर’ 1 अप्रैल से 31 मार्च तक. लेकिन एडीबी आकलन के लिए ‘फाइनेंशि‍यल ईयर’ का इस्तेमाल करता है और दोनों देशों के फिस्कल ईयर की अलग तरह से गणना करता है. उदाहरण के लिए बांग्लादेश के लिए जहां FY19  30 जून को खत्म होता है, वहीं भारत में यह 31 मार्च 2020 तक चलता है.

 
बांग्लादेश तेजी से धनी हो रहा है, भारत से भी ज्यादा तेजी से
एडीबी की रिपोर्ट से पता चलता है कि बांग्लादेश वास्तव में भारत से भी तेजी से धनी हो रहा है. इसके प्रति व्यक्ति जीडीपी में बढ़त साल 2017 में ही भारत को पीछे छोड़ दिया, जब वहां इसमें 6 फीसदी की बढ़त देखी गई, जबकि भारत में 5.8 फीसदी की बढ़त हुई थी. बांग्लादेश 2020 में भी 6.6 फीसदी की तेज गति से बढ़त होगी, जबकि भारत में 5.9 फीसदी की बढ़त ही हुई थी.

इसी तरह बांग्लादेश प्रति व्यक्ति GNI (सकल राष्ट्रीय आय) के मामले में भी अब भारत के करीब जा रहा है. साल 2017 में बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति GNI 1,470  डॉलर था, जबकि भारत का 1,800 डॉलर था. इसकी तुलना में दक्षि‍ण कोरिया का प्रति व्यक्ति GNI 28,380 डॉलर, चीन का 8,690 डॉलर, श्रीलंका का 3,850 डॉलर और पाकिस्तान का 1,580 डॉलर था.

बांग्लादेश में आय की असमानता भी भारत के मुकाबले कम है. UNDP के मानव विकास सूचकांक और संकेतों के मुताबिक साल 2010 से 2017 के बीच बांग्लादेश का गिनी कोफिसिअंट 32.4 था, जबकि भारत का 35.1 था. गिनी कोफिसिअंट से आय में असमानता को मापा जाता है. शून्य का मतलब है पूरी तरह से समानता और 100 का मतलब है पूरी तरह से असमानता यानी ज्यादा अंक वाले देशों में आय की असमानता ज्यादा होती है. इस दौरान दक्षि‍ण कोरिया में गिनी कोफिसिअंट 31.6, चीन में 42.2, श्रीलंका में 39.8 और पाकिस्तान में 30.7 है. यानी इस मामले में पाकिस्तान भी काफी बेहतर है.

हालांकि यह बात ध्यान में रखनी होगी कि बांग्लादेश काफी छोटा देश है और उसकी जनसंख्या महज 16.1 करोड़ है, जबकि भारत की जनसंख्या 135.1 करोड़ तक हो गई है. वर्ल्ड बैंक के अनुसार साल 2018 में भारत की जीडीपी 274 बिलियन डॉलर की थी, जबकि भारत की जीडीपी 2.7 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर की.

ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सलीम रेहान इसके लिए चार बड़े और एक छोटे कारक को वजह मानते हैं- 1. रेडीमेड गारमेंट्स का निर्यात 2. विदेश से आने वाला धन 3. कृषि का सतत विकास 4. माइक्रो फाइनेंस में अच्छी बढ़त और 5. बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सरकारी खर्च बढ़ाना. कुछ जानकार इसके लिए ‘महिला सशक्तीकरण’ को भी एक वजह मानते हैं.

बांग्लादेश की इकोनॉमी में आई तेजी की एक खास विशेषता यह है कि भारत के विपरीत वहां मैन्युफैक्चरिंग (औद्योगीकरण) और निर्यात में अच्छी बढ़त हुई है, जैसा कि जापान, चीन, दक्षि्ण कोरिया और अन्य एशि‍याई अर्थव्यवस्थाओं ने किया था.

एडीबी की एक स्टडी में यह पाया गया कि बांग्लादेश उन एशि‍याई देशों में शामिल है, जिन्होंने 1970 से 2010 के दशक में अपने जीडीपी ग्रोथ और मैन्युफैक्चरिंग में सबसे ज्यादा बढ़त हासिल की है. इस तरह के अन्य देशों में भूटान, कम्बोडिया, मलेशि‍या, दक्षिरण कोरिया और थाइलैंड शामिल हैं. पिछले 14 साल में (FY06 से FY19) बांग्लादेश के मैन्युफैक्चरिंग में 10.2 फीसदी की सालाना औसत बढ़त हुई है.

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