भोपालमध्य प्रदेश

बीपीएल योजना में हो रहा है फर्जीवाड़ा अपात्र लोग ले रहे हैं बीपीएल योजना का लाभ

पटवारी के द्वारा फर्जी रिपोर्ट लगाकर दिए जाते हैं 14 से कम अंक

बीपीएल की शासन की गाइडलाइन को दिखा रहे हैं प्रशासनिक अधिकारी  ठेंगा

छतरपुर
मध्य प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान एवं देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी गरीबों को मुक्त राशन दे रहे है और राशन के अलावा बीपीएल से मिलने वाली तमाम योजनाओं का लाभ भी गरीब परिवारों को दे रही लेकिन छतरपुर जिले अपात्र परिवारों को बीपीएल योजना का लाभ मिल रहा है जिले की सभी जनपदों की ग्राम पंचायतो की बीपीएल धारको की बात करें तो उनके पास जीवन यापन करने वाली तमाम व्यवस्था है व्यवस्थाओं के अलावा उनके पास संसाधन है जमीन जायजाद है इसके अलावा लाखों की संपत्ति होने के बावजूद भी उनका नाम बीपीएल की श्रेणी में आ रहा है बीपीएल योजना के अंतर्गत अगर देखा जाए तो जो बीपीएल योजना के अंतर्गत कानून बनाए गए हैं मापदंड बनाए गए हैं उनके नियम विरुद्ध कार्य किया जा रहा है जैसे 2:50 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन नहीं होना चाहिए पक्का मकान नहीं होना चाहिए प्रति व्यक्ति पहनने की कपड़ों की जांच होती है यहां तक कि उसके खाने की जांच होती है दिन में वह दोनों वक्त खाता है या नहीं यह सब जांच होती है यह बताना पड़ता है कि स्वच्छता को लेकर शौचालय है या नहीं है खुले में जाता है या नहीं जाता है इसके अलावा उसके परिवार में कितने पढ़े लिखे हैं परिवार मजदूरी करता है जीवकोपार्जन के साधन क्या है परिवार के पलायन की स्थिति क्या है कारण सहायता की प्राप्त होता जैसे 13 मद संख्या के आधार पर गरीबी को चिन्हाकन करके श्रेणी विभाजन शेड्यूल के आधार पर हितग्राही को 13 अंक प्रदान किए जाते हैं जिससे वह बीपीएल के लिए पात्र होता है सही मायने में लेकिन अगर देखा जाए तो इसके ठीक विपरीत पटवारी रिपोर्ट लगती है और उस हितग्राही को बीपीएल में पात्र बना दिया जाता है उसके बदले में पैसे का लेनदेन करके बिना जांच किए बिना मौका मुआयना करके उसको गरीबी रेखा में पात्र बना दिया जाता है जिससे शासन ही नहीं प्रशासन जनता की मन में सरकार के खिलाफ उदासीनता और नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है शासन को इस महत्वकांक्षी योजना बीपीएल के द्वारा मिलने वाली योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो पाता है जिससे शासन को करोड़ों अरबों रुपए का नुकसान है मध्यप्रदेश में 2015 से सर्वे नहीं हुआ है और ना ही सर्वे कराने की मंशा  दिखाई दे रही है जो चिंता का विषय है समाजसेवी एमएस निजामी एवं पन्ना लाल अहिरवार के द्वारा बताया गया किस शासन की महत्वकांक्षी योजना पर अपात्र लोग पतीला लगा रहे हैं चेहरे देखकर राजनीतिक संरक्षण में पल रहे परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है जो नहीं मिलना चाहिए अगर इसकी सही मायने में अगर जांच की जाए तो 50% ऐसे परिवार है जो बीपीएल में अपात्र श्रेणियों में आते हैं लेकिन फिर भी वह गरीबी रेखा के अंतर्गत आ रहे हैं राजनगर ब्लॉक के अंतर्गत राजनगर नायब तहसीलदार रूपम गुप्ता द्वारा सभी ग्राम पंचायतों को निर्देश दिया गया है अपात्र लोगों का बीपीएल सूची से नाम काटा जाए लेकिन पटवारी की उदासीनता के चलते आज दिनांक उस पर ना तो जांच की गई और ना ही अपात्र लोगों के नाम काटे गए और ना ही ऐसे परिवारों को चिन्हित किया गया जो बीपीएल योजना अपात्र लोग लाभ ले रहे है शासन की सभी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं जिससे शासन और प्रशासन को लाखों रुपए का नुकसान है देखना होगा जिला प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाती है।

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