उत्तरप्रदेश

शिक्षा प्रेरकों के मानदेय की लड़ाई हाईकोर्ट पहुंची, 38 महीने का नहीं मिला है भुगतान

 लखनऊ
 
साक्षर भारत मिशन के तहत संविदा पर रखे गए प्रदेशभर के एक लाख शिक्षा प्रेरकों के मानदेय की लड़ाई हाईकोर्ट पहुंच गई है। शिक्षा प्रेरकों ने हाईकोर्ट की इलाहाबाद और लखनऊ खंडपीठ में याचिकाएं दायर की है जिसको लेकर सरकार ने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है। साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषा विभाग के निदेशक गणेश कुमार ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को 23 सितंबर को पत्र लिखकर शिक्षा प्रेरकों के संबंध में रिपोर्ट मांगी है।

सरकार की ओर से प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने से पहले निदेशक ने पूछा है कि योजना के तहत कितने निरक्षरों को चिह्नित किया गया और कितने चिह्नित व्यक्तियों को साक्षर किया गया। साथ ही शिक्षा प्रेरकों के कार्यों की सत्यापित रिपोर्ट मांगी है। फरवरी में हाईकोर्ट ने मिर्जापुर के एक मामले में 107 याचिकाकर्ताओं को भुगतान के लिए आवेदन करने और सरकार को नियमानुसार निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।

केंद्र सरकार ने 2009-10 में यह योजना शुरू की थी। यूपी के कुछ जिलों में 2011-12 और प्रयागराज में 2013-14 सत्र से यह योजना चालू हुई। इसके तहत लखनऊ, कानपुर नगर, औरैया, गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद को छोड़कर 49921 लोक शिक्षा केंद्रों पर दो-दो हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर 99482 शिक्षा प्रेरक संविदा पर तैनात किए गए थे। हालांकि 31 मार्च 2018 को योजना बंद कर दी गई थी। शिक्षा प्रेरकों का काम 15 साल से अधिक उम्र के लोगों को साक्षर बनने के लिए प्रेरित करना था।

 

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