इंदौरमध्य प्रदेश

महाकाल मंदिर में वर्ष के अंतिम दिन भी टूटा श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड

 

उज्जैन

12 ज्योतिर्लिंगों में विश्व प्रसिद्ध दक्षिण मुखी बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन वर्ष 2023 में आस्था के नाम रही। एक वर्ष में बाबा के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड सामने आया है। बाबा महाकाल के दरबार से जुड़े धार्मिक पर्वों के साथ आम दिनों में भी श्रद्धालुओं की संख्या कम नहीं रही। वर्ष के अंतिम दिन 31 दिसंबर को भी श्रद्धालुओं की संख्या का रिकॉर्ड सामने आया है।

यूं तो अनादि काल से बाबा महाकाल का मंदिर देश सहित दुनिया में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र रहा है। प्रतिदिन सैकड़ो लोग दर्शन के लिए पहुंचते थे। लेकिन 11 अक्टूबर 2023 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाबा महाकाल के विस्तारित आंगन में बनाए गए श्री महाकाल महलोक का लोकार्पण करने पहुंचे तो धार्मिक नगरी में आस्था का भूचाल आ गया। जो अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। वर्ष 2023 में बाबा महाकाल के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का हर दिन रिकॉर्ड टूटा नजर आ रहा है। वर्ष के अंतिम दिन 31 दिसंबर को महाकाल मंदिर की और जाने वाले हर रास्ते पर आस्था उमड़ती दिखाई दे रही थी। प्रशासन ने 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया है। यही नहीं 2023 15 अगस्त को 5 लाख 50 हजार श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने पहुंचे थे। मंदिर के शिखर पर बने नागचंद्रेश्वर मंदिर को वर्ष में एक बार नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए खोला जाता है उस दिन भी 8 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में प्रवेश किया था जो अब तक का सबसे अधिक होना सामने आया था। यही नहीं सावन माह के पांचवें और छठवें सोमवार पर भी श्रद्धालुओं की संख्या 5 लाख से अधिक रही थी। सावन भादो मास वर्ष 2023 में अधिक मास के साथ आया था और 59 दिनों तक प्रतिदिन एक से डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए थे। 4 जुलाई को शुरू हुआ सावन मास 11 सितंबर को बाबा महाकाल की शाही सवारी के साथ समाप्त हुआ था। इस दौरान 2 करोड़ 25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के धार्मिक नगरी में पहुंचने का आंकड़ा सामने आया था। वर्ष 2023 के आम दिनों में भी प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या 50 हजार से एक लाख के बीच रही। वर्ष भर में बाबा के दर्शन करने वालों का आंकड़ा मंदिर समिति के लिए भी एकत्रित करना असंभव रहा है।

चलित भस्मारती दर्शन शुरू
वर्ष 2023 में बाबा महाकाल के मंदिर में आस्था के लगातार बढ़ते सैलाब को देखते हुए प्रतिदिन तड़के 4 होने वाली बाबा की भस्म आरती में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढऩे लगी थी श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए रात 1 बजे से ही मंदिर के बाहर कतार में लग रहे थे। अब तक भस्म आरती में शामिल होने के लिए मंदिर समिति से अनुमति प्राप्त करने वाले श्रद्धालुओं को ही नंदी हाल में प्रवेश दिया जाता था लेकिन आस्था को देखते हुए मंदिर समिति ने वर्ष 2023 में चलित भस्म आरती दर्शन की शुरुआत कर दी। जो भक्तों के लिए सबसे सुविधाजनक निर्णय साबित हुआ। सावन भादो मास के बाद से भस्म आरती में अनुमति प्राप्त श्रद्धालुओं के साथ ही चलित दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी हजारों में होना सामने आ रही है। देश दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढऩे से शहरी श्रद्धालु बाबा के दर्शन नहीं कर पा रहे थे जिसको देखते हुए वर्ष 2023 में ही शहरी श्रद्धालुओं के लिए अलग से दर्शन व्यवस्था की शुरुआत की गई और प्रवेश द्वार खोला गया जहां स्थानीय श्रद्धालु अपना आधार कार्ड दिखाकर बाबा के दर्शन कर पा रहे हैं। वर्ष 2023 धार्मिक नगरी में आस्था का सबसे बड़ा बदलाव होना भी सामने आया है।

खुले रोजगार के अवसर
ढाई दशक से बाबा महाकाल की नगरी उद्योग विहीन बनी हुई थी रोजगार के अवसर पूरी तरह से खत्म हो गए थे। लेकिन 2023 रोजगार का भी सैलाब लेकर आया। महाकाल लोक बनने के बाद श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए ई रिक्शा चलाने वालों की संख्या में एकाएक इजाफा हो गया और डेढ़ साल में ही ई रिक्शा की संख्या 5000 पार कर गई। श्रद्धालुओं के रुकने के लिए धर्मशाला, होटल, लॉज कम पडऩे लगे थे लोगों ने अपने घरों को श्रद्धालुओं के रुकने का स्थान बनाते हुए रोजगार के अवसर तलाश लिए महाकाल मंदिर से 3 किलोमीटर का क्षेत्र अब होटल, लॉज, होमस्टे धर्मशाला बन चुका है। मंदिर के आसपास फूल प्रसाद जी और धार्मिक सामग्री से जुड़ी वस्तुओं की दुकान सजाने से भी रोजगार के अवसर बढ़ गए हैं। शहर में चाय नाश्ते और भोजन की सैकड़ोंं दुकान खुलने से उद्योग विहीन शहर के अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आई है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *